अमृता अरोड़ा संस्कृत अनुवाद के लेक्चर लेने के बाद तीसरे पहर में स्टैटिस्टिकल मैकैनिक्स और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक थ्योरी पढ़ती हैं. 19 वर्षीया अमृता की शिक्षा संबंधी दिनचर्या का अंत कर्नाटक संगीत के इतिहास के सेशन पर होता है. दिल्ली यूनिवर्सिटी में संस्कृत ऑनर्स की पहले वर्ष की इस छात्रा की तरह 1,70,000 छात्र-छात्राएं चार वर्ष के नए डिग्री कोर्स का फायदा ले रहे हैं.
पिछले साल शुरू किए गए इस प्रोग्राम पर विवाद भी रहा है और इसकी सराहना भी हुई है. कोर्स के ढांचे में बदलाव के बावजूद 94 साल पहले स्थापित यह विश्वविद्यालय आज भी देश में अव्वल है. बेहतरीन शिक्षा और छात्रों की देखभाल के प्रति इसकी निष्ठा इतनी लोकप्रिय है कि साइंस और टेक्नोलॉजी महकमे (डीएसटी) ने इस साल विश्वविद्यालय को 50 करोड़ रु. का अनुदान दिया है. देश में किसी संस्था को इससे पहले इतनी बड़ी रकम नहीं दी गई.
दिल्ली यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर दिनेश सिंह कहते हैं, ''पिछले साल विश्वविद्यालय में कई नई बातें जुड़ी हैं और कई उपलब्धियां हासिल हुई हैं. लेकिन हमारा मुख्य ध्यान छात्रों के लिए व्यावहारिक और खुद सीखने के मौके बढ़ाने पर है.” दिल्ली यूनिवर्सिटी ने इस दिशा में नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एनएसडीसी) के साथ विशेष समझौता किया है जिससे छात्रों को स्वास्थ्य, आइटी, वित्त और बैंकिंग क्षेत्रों में प्रशिक्षण मिलेगा.
इतना ही नहीं, विश्वविद्यालय के सभी 65 कॉलेजों में लघु और मझौले उद्योग मंत्रालय के साथ हुए समझौते के माध्यम से अपने प्रारंभिक कारोबार केंद्र स्थपित किए जाएंगे. ये केंद्र हर छात्र की कारोबारी योजना के लिए 12 लाख रु. बीज राशि के तौर पर मुहैया कराएंगे. विश्वविद्यालय ने दिल्ली में सरकारी एजेंसी सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पाक्र्स ऑफ इंडिया के साथ चिप डिजाइन यूनिट लगाने के लिए 26 करोड़ रु. के समझौते पर भी हस्ताक्षर किए हैं.
वे यह भी बताते हैं कि ''चिप बनाने की नई यूनिट न सिर्फ छात्रों को एक प्रमुख कौशल देगी बल्कि देश में चिप का आयात कम करने में भी मदद मिलेगी. दूसरी ओर वोकेशनल ट्रेनिंग, आन्ट्रेप्रेन्योर मेंटरिंग और विभिन्न विषयों के बीच संपर्क से छात्रों में रोजगार मांगने की बजाए रोजगार देने की क्षमता पिरोने में मदद मिलेगी. हमने कई ऐसे नए कोर्स भी शुरू किए हैं जिनकी जॉब मार्केट में मांग बढ़ रही है. इनमें फॉरेंसिक्स में बीटेक शामिल है.”
दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के अलावा दूसरी गतिविधियों पर भी जोर दिया जाता है. लड़कियों की फुटबॉल टीम लगातार दूसरे साल न्यूजीलैंड की लिंकन यूनिवर्सिटी में ट्रेनिंग लेने गई है जबकि लड़कों की हॉकी टीम विशेष कोचिंग के लिए एडिनबरा यूनिवर्सिटी गई थी. बकौल दिनेश सिंह, ''विदेश के विश्वविद्यालयों के साथ हमारा सहयोग भी बढ़ रहा है.






