साल 2015 तक सबको प्राथमिक शिक्षा का लक्ष्य हासिल करने के लिए भारत को करीब 30 लाख प्राइमरी शिक्षकों की जरूरत है। देश में शिक्षकों की कुल संख्या ही करीब 64 लाख है। यूनेस्को की ताजा रिपोर्ट में शिक्षकों की कमी को पूरा करने के लिए अप्रशिक्षित लोगों की नियुक्ति पर भी सवाल उठाया गया है। इससे पहले 2010 की रिपोर्ट में 2015 तक यह लक्ष्य हासिल करने के लिए 20 लाख शिक्षकों की जरूरत बताई गई थी। मौजूदा हालात में 2015 तक इसे हासिल करना तो असंभव है ही, आगे मुश्किलें और ज्यादा होंगी। आज एजुकेशन भास्कर में देश में शिक्षकों की कमी और टीचर्स ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स की हालत पर चर्चा।
11 लाख सरकारी स्कूल, कम हैं 12 लाख शिक्षक, 8 फीसदी स्कूलों में केवल एक
देशभरमें कुल 10.9 लाख सरकारी स्कूल हैं जिनमें करीब 46 लाख शिक्षक हैं, लेकिन यह जरूरत से करीब 12 लाख कम है। प्राइवेट स्कूलों को मिलाकर देखें तो देश में करीब 65 लाख 30 हजार शिक्षक हैं। करीब 6-11 साल की उम्र के करीब 14 लाख बच्चे स्कूल से बाहर हैं। सबको शिक्षा का लक्ष्य हासिल करने के लिए करीब दो लाख स्कूलों की अभी जरूरत है।
इसलिए शिक्षा का यह है स्तर
साल 2012 की एक रिपोर्ट के अनुसार देश में पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाले 53 फीसदी बच्चे दूसरी कक्षा की किताब सही नहीं पढ़ सकते। जबकि 47 फीसदी गणित के प्राथमिक स्तर के सवाल जैसे जोड़-घटाना भी सॉल्व नहीं कर सकते।
देश में कुल सरकारी स्कूल : 10.9 लाख
सरकारी स्कूलों में शिक्षक : 46.1 लाख
सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की औसत संख्या : 4.2
अनएडेड स्कूलों में शिक्षकों की औसत संख्या : 8.8
स्कूलों में हैं केवल एक शिक्षक : 8.3 %






