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Sunday, 19 October 2014

इंडिया टुडे-नीसलन बेस्ट यूनिवर्सिटी सर्वेक्षण 2014: तीसरे नंबर पर बीएचयू


अधिकतर लोगों के लिए विश्वविद्यालय में अकादमिक करियर किशोर उम्र के आक्रोश के अंत, बिंदास दिनों की खट्टी-मीठी विदाई और अपने जोश की सीमाओं के भीतर बौद्धिक क्षमता के विकास के दौर की शुरुआत की तरह होता है.

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू) अपने संस्थापक पंडित मदनमोहन मालवीय की बेहतरीन सोच को साकार करने के लिए आज भी अपने छात्रों को बहुत कुछ मुहैया कराती है. प्राचीन नगरी वाराणसी के बीचोबीच 1,360 एकड़ में फैला कैंपस शिक्षा का ऐसा द्वीप है जहां साल दर साल राष्ट्र निर्माताओं की पीढिय़ां तैयार हुई हैं.

एशिया के सबसे बड़े आवासीय विश्वविद्यालय बीएचयू की स्थापना 1916 में विशिष्ट बौद्धिक शिक्षा केंद्र के रूप में की गई थी और यह अनुभवों का विस्तार देने वाली ज्ञान परंपरा का पर्याय बन गया. इंटरडिसिप्लिनरी और नए रिसर्च वर्क के लिए मशहूर इस संस्थान को इस साल इंडिया टुडे-नीलसन के बेस्ट यूनिवर्सिटी सर्वेक्षण में देश में तीसरे स्थान पर आंका गया है.

क्या कहते हैं वाइस-चांसलर लालजी सिंह.....


“जूलॉजी का छात्र होने की वजह से मैं कैंपस में पेड़-पौधों की विविधता को देखकर चकित रह गया था”
बीएचयू के साथ मेरा अनोखा रिश्ता तभी से शुरू हुआ जब मैंने जूलॉजी के छात्र के तौर पर यहां दाखिला लिया. मैं परिसर में पेड़-पौधों की विविधता को देखकर चकित था. अब मैं छात्र नहीं रहा लेकिन आज भी कैंपस की व्यापकता पर मैं मंत्रमुग्ध हूं जो हर रोज मानो एक नया रूप लेकर सामने आती है.
मैं यहां के 35,000 से ज्यादा छात्रों से हमेशा कहता हूं कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं है. मैं युवाओं की अकूत ऊर्जा से प्रभावित हुए बिना नहीं रहता. इसे सकारात्मक दिशा में लगाने और मौकों को हासिल करने के लिए उन्हें खास प्रशिक्षण की जरूरत है. इसीलिए चौबीसों घंटे साइबर लाइब्रेरी खुली होती है और रात 10 बजे के बाद छात्राओं को घर छोडऩे की व्यवस्था की गई है.
इन छोटे-छोटे कदमों का मिला-जुला असर प्रतिबद्ध छात्रों को आगे बढऩे में मददगार होगा. हर रोज मुझे इसलिए भी अतिरिक्त संतोष मिलता है कि मेरे काम के सकारात्मक नतीजे मुझे मिल रहे हैं. हाल में कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से फोन आया कि वहां की छात्र यूनिट ने बीएचयू को नए ढंग से शिक्षण और विभिन्न कोर्सेज की पढ़ाई के मामले में दुनिया भर में टॉप भारतीय विश्वविद्यालय माना है.