सीबीएसई तीन साल पहले ही स्कूलों में कम से कम प्राइमरी तक ‘नो बैग’ कल्चर लाना चाहता था, लेकिन बहुत अच्छा रिस्पांस मिलने पर मामला लटकता रहा। हालांकि एकबार फिर से सीबीएसई स्कूलों में होमवर्क के घंटों को कम करने के कॉन्सेप्ट को लागू करने के लिए आक्रामक रूप से सामने आया है। बोर्ड ‘नो बैग’ और ‘ओनली वन आवर’ होमवर्क के लिए पेरेंट्स, टीचर्स और स्टूडेंट्स तीनों को सर्वे में शामिल कर रहा है, ताकि सभी बोर्ड के तर्कों पर बात करते हुए होमवर्क के नाम पर कॉपियां भरने के कॉन्सेप्ट को खत्म करें और उसकी जगह रिसर्च बेस्ड होमवर्क को जगह मिल सके। ऑनलाइन और ऑफलाइन सर्वे के जरिए सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन ने स्टूडेंट्स, पेरेंट्स और टीचर्स से पूछा है कि होमवर्क का मेन पर्पज क्या है।
छोटी क्लासेज में कोई किताब नहीं
पुलिस डीएवी स्कूल में सीबीएसई की गाइडलाइन्स को फॉलो करते हुए सेकेंड क्लास तक नो बैग कॉन्सेप्ट चल रहा है। सेकेंड क्लास तक कोई होमवर्क नहीं दिया जाता। कोई किताब घर से नहीं लानी लेकर जानी है। थर्ड से पांचवीं क्लास तक भी 90 फीसदी ओरल पढ़ाई कराई जाती है, लिखित होमवर्क देना भी हो तो एक ही विषय में दिया जाता है। ताकि होमवर्क को ज्यादा से 20 से 25 मिनट ही स्टूडेंट्स दें। प्रिंसिपल रश्मि विज का कहना है कि हमारा फोकस रीडिंग हैबिट्स को डेवलप करना है। होमवर्क देने की बजाए हम क्लास में डिक्टेशन, कॉम्प्रिहेंसिव और रीडिंग करवाते हैं। बड़ी क्लासेज यानी छठी से लेकर दसवीं तक एक से डेढ़ घंटे या ज्यादा से ज्यादा 2 घंटे का होमवर्क तो हर हालत में होता है। हालांकि इसपर भी हम काम कर रहे हैं कि कैसे इसे थोड़ा और कम किया जा सके।
क्लास वाइज होमवर्क टाइमिंग
प्राइमरी क्लासेज का होमवर्क टाइम इसलिए कम क्योंकि सीबीएसई ने नो बैग का कॉन्सेप्ट अभियान कुछ साल पहले लॉन्च किया। लगभग सभी स्कूलों में प्राइमरी ओर प्री प्राइमरी क्लासेज में एक दिन में एक ही सब्जेक्ट पढ़ाया जाता है। इसलिए रिटन काम कम होता है। ग्यारहवीं और बारहवीं के होमवर्क का टाइम स्ट्रीम पर डिपेंड करता है। कॉमर्स को औसतन 3 घंटे हैं तो साइंस में नॉन मैडिकल और मैडिकल दोनों स्ट्रीम को 4 घंटे का समय भी लगता है। साइंस स्ट्रीम के स्टूडेंट्स होमवर्क और स्कूल के अलावा कोचिंग सेंटरों में से 2 से 3 घंटे की क्लास लेते हैं।
नो बैग कल्चर पेरेंट्स ने बदलवाया
दो साल पहले सीबीएसई के ‘नो बैग और बैग फ्री’ एजुकेशन को बढ़ावा देते हुए एमजीएन अर्बन एस्टेट स्कूल में प्रिंसिपल जतिंदर सिंह ने नर्सरी और केजी विंग के लिए होमवर्क बिलकुल बंद कर दिया। पेरेंट्स को बच्चों को बैग देकर भेजने के लिए कहा गया। इसके पीछे सोच थी कि इतने छोटे बच्चों के लिए सीखना जरूरी है, लेकिन बोझ नहीं। आठ महीने मुश्किल से इस ट्रैंड को चलाया। पेरेंट्स शिकायत लेकर पहुंच जाते थे कि बच्चों को कुछ तो होमवर्क दिया करो। सो जाते हैं या खेलते रहते हैं। पेरेंट्स को बहुत समझाया फाइनली फिर से होमवर्क ट्रेंड शुरू करना पड़ा।
हालांकि प्रिंसिपल जतिंदर सिंह कहते हैं कि यह साढ़े तीन घंटे की क्लास होती है, ढाई घंटे पढ़ा कर एक घंटा होमवर्क करवाने पर लगाया जा सकता है, लेकिन पेरेंट्स तो साथ दें। छठी से शुरू होने वाली क्लासेज में बच्चों को होमवर्क डेढ़ से दो घंटे का मिलता है। सीबीएसई के नो बैग ट्रैंड के बाद इसका टाइम कम हुआ है, नहीं तो पहले तीन से चार घंटे का टाइम होता था।






